Wednesday, April 1, 2015

खण्डवा जिले मे लगातार जारी है बाल अधिकारों का हनन

गणेश कानडे

child-right
मध्य प्रदेष के खण्डवा जिले मे बाल अधिकारों के प्रति परिवार और समाज मे अपेक्षाकृत कम जानकारी जागरूकता व सर्तकता का अभाव है। जिले में बच्चों की सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है। यहाॅ बच्चों का आये दिन  अपहरण, बंधुआ मजदूर बनाना, स्कूल में प्रताड़ना, बाल विवाह की घटनाऐं हो रही है। कुछ समय पूर्व ही यहाॅ स्कूली प्रताडना व बाल विवाह से बचने के लिये 3 बच्चों ने आत्महत्या कर ली और 13 बच्चों को महाराष्ट्र मे बंधुआ मजदूर बनाये जाने की घटनायें भी प्रकाष में आई हंै। 
         
जिला खण्डवा में दिसम्बर 2014 के अंत तक करीब 100 बच्चे घरों से गायब हैं। पुलिस ने इन मामलों मे गुमषुदगी एंव अपहरण के 100 से अधिक केस दर्ज किये हैं। इनमंे 18 बालक और 82 बालिकायें हैं। इनमंे चार माह से अधिक पुराने 71 प्रकरण हैं जिन्हें नियमानुसार जिले की एन्टी ह्यूमैन ट्रेफिकिंग सेल को सौंप दिये गये हैं। बचपन बचाओ आन्दोलन द्वारा इस मामले मंे सुप्रीम कोर्ट मे रिट याचिका क्रमांक 75/12 राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज किये जाने के पष्चात जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिले मंे कुल 15 पुलिस थानांे एवं पुलिस चैकियों मे पैरालीगल वालंटियर्स नियुक्त किये गये। इनके द्वारा माह मे कम से कम चार बार इन थानांे में बैठकर या विजिट कर बच्चों के इन मामलों की निगरानी की जा रही है। जिले के 12 थानांे में से खालवा थाने मे सर्वाधिक 14 अपहरण, हरसूद थाना मे 10 प्रकरण, खण्डवा नगर के मोवट थाने मे 09 एवं कोतवाली में 8 प्रकरण दर्ज किये गये । इसी प्रकार जावर मे 05, छैगाॅव माखन मे 04 , पंधाना मे 02, किल्लौद मे 06 , पिल्लौद मे 02, मूंदी में 04, मंधाता मे 05, एवं नर्मदा नगर थाने मंे 4 प्रकरण दर्ज किये गये। 
            
जिले के पंधाना विकासखण्ड के ग्राम विष्वासपुर में एक स्कूली छात्र विषाल पिता नन्दकिषोर कोरकू उम्र 12 वर्ष गुड़ी के अनुसूचित जनजाति छात्रावास से 12 दिसम्बर 2012 को घर आ गया ओर पास ही के गांव नीमखेड़ी मे लगे मेले में अपने दोस्तों के साथ चला गया और वहां से वह गायब हो गया। घर वालों ने ढूॅढा़ तो वह बालक ग्राम देवली के एक मिषन होस्टल में मिला, जो कि गांव से 50 किमी दूर था। वह बालक षासकीय छात्रावास में असुविधाओं के कारण वहां रहना नही चाहता था। वह मिषन हास्टल में रह कर अपनी पढ़ाई करना चाहता था। इसी प्रकार ग्राम टाकल खेडा का कक्षा 9 वीं का छात्र राधेष्याम पिता नन्नू अनूसूचित जनजाति छात्रावास सिंगोटा से 12 दिसम्बर 2014 को गायब हो गया और 4-5 दिन बाद 16 दिसम्बर 2014 को अचानक घर पहुंच गया। गायब होन केे समय वह कहां गया था इस प्रष्न पर वह चुप्पी साध लेता है।  
              
छात्रों द्वारा आत्महत्या करना -इसी प्रकार से जिले के छैगांव माखन विकासखण्ड अन्र्तगत ग्राम पोखरपीर की षासकीय माध्यमिक षाला के कक्षा 8 के छात्र अरूण पिता राकेष अटूटे निवासी भीलखेड़ी द्वारा जहरीली दवा पीकर आत्महत्या का केस सामने आया है। बच्चे के माता पिता आत्महत्या का कारण स्कूल के षिक्षक द्वारा उसे डांट फटकार कर प्रताडि़त किया जाना बता रहे हैं। इसी प्रकार छोटी छैगांव में चम्पानगर निवासी षासकीय माध्यमिक षाला में कक्षा 9 वीं के छात्र षिवम कनाडे़ द्वारा स्कूल ना जाकर संदिग्ध परिस्थितियों में घर में फांसी लगा कर आत्म हत्या का मामला दिसंबर 2014 सामने आया। इन दोनों मामलों मेें पुलिस जांच कर रही है।
             
बाल विवाह के कारण आत्महत्या- खण्डवा जिले के ही पुनासा जनपद के ग्राम इनपुन मे कटलरी का सामान बेचने वाले परिवार की बालिकाओं द्वारा 10 दिसंबर 2014 को ज़हर पीकर एक कुए मे कूद जाने की घटना घटी और उपचार के दौरान ही 16 दिसंबर को इनमंे सेे एक की मौत एम वाय हास्पिटल इन्दौर मे हो गयी। इस घटना के बाद पुलिस जांच मंे जीवित बची एक बालिका ने अपने बयान मंे बताया कि, उसके पिता उनका बाल विवाह करा देना चाहते थे। जिसके विरोध में इन बालिकाओं ने यह कदम उठाया और आत्महत्या का प्रयास किया।
               
बाल श्रमिक -जिले के आदिवासी विकासखण्ड खालवा के ग्राम छापाकुण्ड का एक परिवार पलायन कर अल्प समय के लिये महाराष्ट के औरंगाबाद जिले मे काम करने के लिए गया था। जहाॅ खाने पीने की दिक्कतों के कारण परिवार अपने बेटे भगवान पिता किषोर को अपने एक रिष्तेदार के यहां छोड़ आये थे। उस रिष्तेदार ने भगवान को घरेलू नौकर बना लिया और जब वह बीमार पड़ा तो 04 दिसम्बर 2014 को खण्डवा के एक निजी अस्पताल मे छोड़ दिया था। जिसे बाद मे चाइल्ड वेल फेयर कमेटी द्वारा उसके माता पिता के सुर्पुद किया गया।
              
महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे संविधान में बच्चों को विभिन्न प्रकार के कानूनी हक व अधिकार दिये हैं। विकास, संरक्षण, भागीदारी, एवं जीवन रक्षा संबंधी महत्वपूर्ण अधिकार दिये गये हैं। इसी परिप्रेक्ष्य मे संसद एवं सरकार द्वारा विभिन्न कानून,आयोग बनाये गये व नियम एवं प्रावधानांे का पालन सुनिष्चित किया गया है। विकास के लिये एकीकृत बाल विकास परियोजना, संरक्षण के लिये एकीकृत बाल संरक्षण योजना चलायी जा रही है। 
            
प्रदेष में राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग का गठन किया गया है। जिला स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्षन कमेटी बनायी गयी है और चाइल्ड प्रोटेक्षन आॅफिसर बनाये गये हैं। ब्लाक,ग्राम स्तर पर भी चाइल्ड प्रोटेक्षन कमेटी बनायी गयी है। विधि विरोधी बच्चों के लिये किषोर पुलिस ईकाई व किषोर न्यायालय बनाये गये है। न्यायालय मे किषोर न्यायालय बनाए गए है वहीं देखरेख की आवष्यकता वाले बच्चों के लिये संस्थागत होम बनाये गये हैं। 
               
सरकार द्वारा तो इतनी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनायें संचालित की जा रही हंै लेकिन अनुसुचित जनजाति बहुल इस जिले मे जन जागरूकता के अभाव में इसका लाभ लोगों तक पहुॅच नही पा रहा है। इस क्षेत्र में विषेष प्रयास कर लोगों को जागरुक करने की आवष्यकता है। प्रषासन को इस ओर तत्काल और सघन प्रयास करने की जरुरत है। यदि परिवार एंव समाज मे बाल अधिकारों की जानकारी और अधिकारों को लेकर बने कानून एवं योजनाओं के संबंध मे ज्ञान होता साथ ही सर्तकता व जागरूकता होती तो संभव है कि उपरोक्त घटनाये नहीं घटती। 

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