HT Bhopal 22 July 2014 |
क्राई (चाइल्ड राइटस् एंड यू) एवं मध्य
प्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच द्वारा विगत् 2
वर्षों से बाल उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जो
कि पिछले कुछ वर्षों से म.प्र. के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे बाल सहभागिता की
प्रक्रिया का अंश है। इस बार के बाल उत्सव
की थीम ‘‘सुरक्षा हमारा हक’’ है।
आंकड़े गवाह हैं कि देश में बच्चे
महफूज नही हैं। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नही है। प्रदेश में जनवरी 2008 से
मार्च 2013 के बीच कुल 29,828 नाबालिग लड़कियां गायब हुई हैं जिनमें
4,990 लडकियां अभी तक नही मिली है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो 2012 के अनुसार म.प्र. देष में बच्चों के विरुद्ध
दुष्कर्म के मामले में पहले स्थान पर है
वहीं बच्चों के विरुद्व अपराध (13.5
प्रतिशत) के मामले में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में बेटियों की संख्या लगातार कम
होती जा रही है। पिछले 10 सालों में प्रति हजार लड़कों पर 14 बेटियां कम हो गई हैं। यानी शून्य से
छह साल तक के 1000 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 918 लड़कियां रह गई हैं। देश का संविधान
बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों की हिफाजत, देखभाल, विकास और शिक्षा की गारंटी देता है।
बाल मजदूरी, बंधुआ मजदूरी, शिक्षा और बाल अधिकारों से संबंधित
अनेक कानून बनाए गए हैं लेकिन हालात में अपेक्षाकृत बदलाव देखने में नही मिल रहा
है।
इस बाल उत्सव में म.प्र. के विभिन्न
जिलों से आए बच्चे सुरक्षा के अधिकार को लेकर अपने अनुभव नाटक के माध्यम से
प्रस्तुत कर रहे हैं, इसके साथ ही वे स्थितियों को बेहतर बनाने
के लिए अपनी मांगे भी रखेंगे। बाल उत्सव में इन बच्चों द्वारा कुल 3 नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। ये नाटक
बच्चों की ‘‘सुरक्षा के अधिकार’’ के तीन आयामों (बाल विवाह, बाल मजदूरी एवं गुमशुदा बच्चे) पर
केन्द्रित होंगे। बच्चों द्वारा नाटक प्रस्तुति के बाद पैनल परिचर्चा का आयोजन
किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में श्री वाल्टर पीटर ने सहजकर्ता की भूमिका
निभाई है, जो पिछले 20 साल से ‘‘थिएटर इन एजूकेशन’’ के जरिए बच्चों, षिक्षकों एवं अभिभावकों के साथ जुड़़े
हुए हैं।
मध्यप्रदेश में बाल सुरक्षा को लेकर
जमीनी स्थिति:
सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई लिखित जानकारी के अनुसार
म.प्र में जनवरी 2008 से मार्च 2013 के बीच कुल 29,828 नाबालिग लड़कियां गायब हुई हैं जिनमें 4,990 लडकियां अभी तक नही मिली
हैं।
मध्य प्रदेश के 4 प्रमुख जिलों (ग्वालियर, इन्दौर, भोपाल और जबलपुर) में 2004 से 2011 तक कुल 18435 लापता हुए बच्चों की
रिपोर्ट दर्ज की गई है, जो कि इसी अवधि के दौरान मध्य प्रदेश में कुल गायब बच्चों का 28 प्रतिशत है। इन चार जिलों
के लापता बच्चों में 45 प्रतिशत लड़कियाँ हैं।
मध्यप्रदेश बाल मजदूरी के मामले में देष में 5वें स्थान पर है, यहाँ 8.41 प्रतिषत बाल श्रमिक हैं । 5 से 14 साल आयु समूह के बच्चों में
‘‘बाल मजदूरी सहभागिता दर’’ का राष्ट्रीय औसत 5 प्रतिशत है। वहीं मध्यप्रदेश
इस मामले में 6.71 प्रतिषत के साथ देश में 5वें स्थान पर है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 3 (2005-06) के अनुसार मध्यप्रदेश
बालविवाह के मामले में 57. 3 प्रतिशत के साथ देश में
चैथे स्थान पर है।
राष्ट्रीय महिला आयोग के अनुसार मध्यप्रदेश में होने वाली
शादियों में 73 फीसद शादियां अवयस्क उम्र
में कर दी जाती हैं।
म.प्र में पिछले तीन वित्तीय वर्षो (2010-11, 2011-12, 2012-13 और 2013-14) में राज्य के कुल बजट आबंटन
में बच्चों के लिए बजट आबंटन की हिस्सेदारी लगातार 15 से 17 फीसदी ही रही है। वित्तीय वर्ष 2013-14 में बच्चों के लिए आबंटित
कुल बजट में से बाल विकास के लिए 16 प्रतिशत, बाल शिक्षा के लिए 33 प्रतिशत तथा बाल सुरक्षा के
लिए 1 प्रतिशत और बाल स्वास्थ के
लिए कोई राशि आवंटित नही की गई है।
हहमारी मांगे:
प्रदेश में बच्चों के लिए सुरक्षित
वातावरण तैयार किया जाए ताकि यहाँ बच्चे
शोषण, हिंसा से महफूज रह सकें। इसके लिए
प्राथमिकता से बाल संरक्षण के लिए गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक बनाए गए ढांचों को
मजबूत किया जाये। साथ ही साथ बच्चों की शोषण, हिंसा
और दुव्र्यवहार से रक्षा करने वाले सभी कानूनों को कठोरता से लागू किया जाए, जैसे कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, बाल मजदूरी निवारण एवं उन्मूलन अधिनियम
1986, प्रीवेन्षन ऑफ़ चाइल्ड सेक्सुअल ओफेन्स 2013 आदि।
प्रदेश के प्रत्येक गांव एवं ब्लाक स्तर पर ग्राम बाल संरक्षण समिति एवं ब्लाक बाल संरक्षण समिति का गठन किया जाए।
गुमशुदा बच्चों पर प्रभावी रोक थाम के
लिए मानव तस्करी विरोधी सेल (एंटी ह्यूमैन ट्रेफिंकिग सेल) को प्रभावी रुप से
क्रियाषील बनाया जाये और जिन जिलों में सेल नहीं है वहां गठित किया जाए।
यह सुनिष्चत किया जाये कि सभी पुलिस
थानों में गुमषुदा बच्चों की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दर्ज हो एवं सुप्रीम कोर्ट
की गाइड लाइन के अनुसार प्रत्येक गुमषुदा बच्चे की रिपोर्ट को ही प्रथम सूचना
रिपोर्ट माना जाएगा।
प्रदेश के पुलिस विभाग में बाल
अधिकारों को लेकर एक नया कैड़र बनाया जाये जो केवल बच्चों से सबंधित मुद्दे ही
देखें साथ ही साथ पुलिस थानों में तैनात बाल कल्याण अधिकारियों को सघन प्रषिक्षण
दिया जाये।
प्रदेश में एसओपी (स्टेंडर्ड आॅपरेटिंग
प्रोसीजर) के मानकों को लागू किया जाए।
प्रदेश के प्रत्येक जिले में
सी.डब्ल्यू.सी. की बैठकों के समय एवं दिन में एक रुपता हो।
बाल विवाह को रोकने के लिए स्थानीय
निकायों एवं समाज की भूमिका भी सुनिष्चित किया जाए।
प्रदेश के बाल श्रम सधन क्षेत्रों में बाल मजूदरी में
लगे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासकीय शालाओं एवं सरकारी सहायता से चल रहे
अन्य संस्थाओं में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था की जाये। इससे इन
बच्चों को शिक्षा से जुड़ने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में बच्चों के लिए बाल सुरक्षा
का बजट बहुत कम है इसे बढ़ाया जाये और व्यय भी किया जाये।
मध्यप्रदेश लोक संघर्ष साझा मंच
बच्चों के समग्र
अधिकारों के लिये प्रतिबद्ध गठबंधन
ई 7/6
एस.बी.आई. कालोनी, अरेरा कालोनी, भोपाल, मध्यप्रदेश
।
फोनः0755-4277228,
ई-मेल- info.mplssm@gmail.com
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