Tuesday, March 20, 2012

सरकारी स्कूलों में बच्चों को ही करनी पड़ती है शौचालय की सफाई



                                              THURSDAY, 15 MARCH 2012 02:07 WRITTEN BY पीपुल्स संवाददाता


भोपालप्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से शौचालय साफ कराए जाते हैं। स्वयंसेवी संस्था मप्र लोक संघर्ष साझा मंच ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। यह रिपोर्ट हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव मनोज झालानी को सौंपी गई है। रिपोर्ट 13 जिलों के 188 स्कूलों के निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल 149 में से 37 स्कूलों में शौचालय नहीं होने का उल्लेख है। उधर, प्रदेश में मुख्य सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश किया है, जिसमें प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय होना बताया गया है।

 विभाग के निर्देश पर मंच ने 13 अन्य संगठनों के सहयोग से प्रदेश के 13 जिलों में सर्वे कराया था। इस दौरान 149 प्राइमरी एवं 39 मिडिल स्कूलों का सर्वे किया गया। सर्वे टीम ने 149 में से 37 प्राइमरी स्कूलों में शौचालय नहीं पाए, जबकि 112 में से 60 स्कूलों में शौचालयोें का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। दरअसल, इन स्कूलों में पानी की व्यवस्था नहीं है। शेष 52 स्कूलों के शौचालयों का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इनमें से 26 शौचालयों की सफाई विद्यार्थियों को ही करना पड़ती है। इन शौचालयों की देखभाल भी नहीं हो रही है। उधर, 39 में से 7 मिडिल स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। शेष में से सिर्फ 13 स्कूलों में शौचालय का इस्तेमाल किया जा रहा है।

शहरी क्षेत्रों में भी शौचालय का अभाव

सरकारी स्कूलों में शौचालय का अभाव सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है। शहरी क्षेत्र भी उनसे पीछे नहीं हैं। सर्वे में शामिल ग्वालियर के 10 स्कूलों में से दो में शौचालय नहीं हैं। इंदौर के चार में से तीन स्कूलों में शौचालय हैं, जिनमें से दो स्कूलों में छात्राओं के शौचालय हैं, लेकिन उनमें ताला लगा रहता है। इसलिए छात्र एवं छात्राएं एक ही शौचालय का इस्तेमाल करते हैं।

फिर नहीं लौटती वह

टीम ने प्राइमरी एवं मिडिल स्कूल कान्हासैया का सर्वे किया। यहां बताया गया कि पानी के अभाव में शौचालयों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। बच्चे पीने का पानी घर से लाते हैं और बड़ी छात्राएं शौचालय की सुविधा के लिए घर जाती हैं और फिर लौटकर नहीं आतीं।

सीएस ने पेश किया हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शौचालय के अभाव को गंभीरता से लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हर हाल में 30 नवंबर तक प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण कराने का आदेश दिया था। इसके बाद विभाग ने अस्थाई शौचालय बनाने के निर्देश जारी कर दिए। फिर भी कोर्ट ने 31 दिसंबर तक पक्के शौचालय बनाने की सीमा तय कर दी थी।

डीईओ से मांगी रिपोर्ट

सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मंगाकर मुख्य सचिव अवनि वैश्य ने कोर्ट में हलफनामा पेश कर दिया, जिसमें सभी स्कूलों में शौचालय निर्माण होने का भरोसा दिलाया गया है।

इन जिलों में हुआ सर्वे

धार, श्योपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, रीवा, सतना, दमोह, देवास, अलीराजपुर, भोपाल, इंदौर एवं ग्वालियर शामिल हैं।


sources-http://www.peoplessamachar.co.in


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