Thursday, May 14, 2015

बच्चे इंतजार नहीं कर सकते

                                                 ध्रुव गुप्त



बच्चे इंतजार नहीं कर सकते
बच्चों को चाहिए
मां भर ममता
पिता भर प्यार
पहाड़ भर चाकलेट 
और एक कभी न खत्म होने वाली कहानी
बच्चे चाहते हैं
घर के सारे पतलून और साड़ियां उन्हें
ठीक-ठीक आ जाएं इसी वक्त
इसी वक्त छू लें वे पिता की ऊंचाई
मां का कद
रसोई में पक जाए दाल-रोटी
पेड़ों पर अमरुद
इसी वक्त
बच्चे चाहते हैं
चांद से भर जाय जेब
तितलियों से घर
इन्द्रधनुष से आकाश
तारों से भर जाएं सड़कें
बच्चे चाहते हैं
दुनिया के तमाम राक्षस मर जाएं
एक साथ
जीवित हो उठें सारी परियां
और उनके राजकुमार
रोज मने उत्सव घर में
मिठाईयों से भरे रहें मर्तवान
बच्चे अधीर हैं
अपनी पसंद की चीजों के लिए
वे चीख पड़ेंगे किसी भी वक्त
तोड़ देंगे सारे घर की नींद
बच्चे इंतजार नहीं कर सकते
हमारी तरह
आहिस्ता आहिस्ता दुनिया बदलने का !


(कविता-संग्रह 'जंगल जहां ख़त्म होता है' से)


ध्रुव गुप्त जी के फेसबुक वाल से साभार 

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