Saturday, September 1, 2012

शिक्षा हमारा हक’’ बाल उत्सव



दिनांक 30 जून 2012, आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल में मध्यप्रदेष लोक संघर्ष साझा मंच एवं क्राई, नईदिल्ली द्वारा ‘‘शिक्षा हमारा हक’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेष के 10 जिलों से आए 70 बच्चों ने षिक्षा की बाधाओं को नाटक के माध्यम से बहुत ही प्रभावी तरीके से संप्रेषित किया। शिक्षा अधिकार कानून के क्रियान्वयन और बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधाओं पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में बच्चों की शिक्षा के अधिकार से संबंधित मुद्दों जैसे स्कूल से बाहर बच्चे, शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न, और शालाओं में मूलभूत सुविधाओं की कमी, षिक्षकों की कमी आदि पर संवाद कायम करने की कोषिष की गई। इस कार्यक्रम में बच्चो की आवाज को सुनने और समर्थन देने के लिए मध्यप्रदेश  की कई सहभागी संस्थाओं प्रतिनिधि, षिक्षाविद् तथा प्रषासन से जुड़े लोग शामिल थे।

इस संवाद की खास बात यह थीं कि यह सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों, शिक्षा विदों और प्रशासन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें बच्चों की भी प्रभावी सहभागिता सुनिष्चित की गई। इस प्रकार यह केवल सैद्धांन्तिक बहस तक सीमित रहने वाला कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसमें बच्चों की आवाज को शामिल कर जमीनी धरातल पर समस्याओं का समाधान करने के तरीके तलाशे गए।

उद्घाटन सत्र में म.प्र. लोक संघर्ष साझा मंच के संयोजक गोविंद यादव ने कार्यक्रम में आए सभी भागीदारों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देष्य बताए । इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा के अधिकार के लिए विगत् वर्षों में मंच द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। 

क्राई संस्था के नाॅर्थ रीजन के मैनेजर शुभेन्दु भट्टाचार्य ने कहा कि, बच्चे हमारे सबसे महत्वपूर्ण स्टैक होलडर्स है, उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। उनके आवाज सुने बिना हम शिक्षा के मामले में जो भी सुधार या काम करेंगे वह अधूरा ही रहेगा। क्योंकि सच्चाई उन्हें पता होती है और वे ही उससे जूझते हैं। इसलिए बच्चों की आवाज को विशेष   महत्व देने की जरूरत है। 

यूनाईटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) के राज्य प्रतिनिधि अमित आनंद ने कहा कि, शिक्षा की गुणवत्ता का अभाव इसलिए हैं क्योंकि उसे सरल व रोचक नहीं बनाया गया है। इससे षिक्षा बच्चों के लिए उबाऊ हो जाती है और उनके सीखने की गति धीमी या खत्म हो जाती है। अतः षिक्षा को बहुत ही सुरूचिपूर्ण बनाने की जरूरत है।

बच्चों द्वारा नाटक के रूप में की गई अभिव्यक्ति के बाद अतिथि वक्ताओं में गोविंद यादव संयोजक मध्य प्रदेश  लोक संघर्ष साझा मंच, डा. आर.एन.स्याग समावेश  डा. रचना त्यागी अवर सचिव, महिला एवं बाल कल्याण समिति, विधानसभा, एल.एस हरदेनिया, संयोजक, राष्ट्रीय सेक्युलर मंच, श्री बी. एन. त्रिषाल शिक्षाविद्, डा. सुनन्दा रघुवंषी स्पर्श संस्था, प्रदीप जुलू परवरिष संस्था ग्वालियर, वीरेंद्र मिश्रा संवेदना, राघवेन्द्र कुमार एडव्होकेट, हाईकोर्ट, जबलपुर, रमेष शर्मा, सी.आई.डी, श्याम बोहरे सामाजिक कार्यकर्ता, डाॅ. रिजवान उल हक, शिक्षा विद्, डा. राहुल शर्मा, भारत ज्ञान विज्ञान समिति, म.प्र. द्वारा अपने विचार व्यक्त किए 

इन विचारों के आधार पर सामने आए प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैः-
  •  शिक्षा अधिकार कानून के बारे में लोगों में जानकारी का प्रसार किया जाए। साथ ही लोगों तथा  स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा षिक्षा अधिकार कानून को सुनिष्चित करने के लिए अन्य कानूनों व सुविधाओं का उपयोग किया जाना चाहिए। बच्चों एंव महिलाओं की समस्याओं को लोग सीधे संसदीय समिति को भेज सकते हैं। किन्तु वास्तव में ऐसा बहुत कम या नहीं के बराबर होता है। अतः लोगों द्वारा बच्चों की षिक्षा के मुद्दों को संसदीय समिति में भेजकर एक असरकार पैरवी की जा सकती है।

  •  गरीबी अशिक्षा हमारा हक’’ बाल उत्सव का मुख्य कारण है। किन्तु गरीबी दूर करने मे दीर्घकालीन योजनाओं की जरूरत है। गरीबी बच्चों की षिक्षा में बाधा न बनें, इसके लिए सरकार द्वारा लागू विभिन्न योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति, सायकल वितरणनिषुल्क किताबों आदि के बेहतर क्रियान्वयन के प्रयास किए जाए। साथ ही परिवार की आय के स्रोत व रोजगार को बढ़ाने के लिए रोजगार गारंटी तथा आजीविका आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी जोर देना होगा। ताकि गरीबी का असर शिक्षा हमारा हक’’ बाल उत्सव पर न पड़े और बच्चे बाल मजदूरी की ओर न जाएं।

  •  सभी बच्चों के शाला में नामांकन की मुहिम चलानी होगी। किन्तु यह मुहिम सिर्फ नामांकन तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शाला में बच्चांें को टिकाए रखने की भी कोषिष होनी चाहिए। बच्चेे जिन कारणों से शाला से ड्राप आउट होते हैं, उन कारणों की पहचान कर उसके निराकरण के लिए रणनीति बनाई जानी चाहिए।

  • शाला में बच्चों को दण्ड न दिया जाए, पढ़ाई खेल-खेल में हो तथा शिक्षा हमारा हक’’ बाल उत्सव रूचिकर बने इसके लिए लगातार शैक्षिक नवाचार की जरूरत है। साथ ही शाला प्रबंधन समिति की नियमित निगरानी की प्रक्रिया को मजबूत बनाने की जरूरत है।

  • शाला प्रबंधन समिति को इस बात के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वह शाला में  समानता लाने तथा शाला में भेदभाव मुक्त एवं सजा मुक्त वातावरण बनाने की दिशा  में पहल कर सकें।

  • बच्चों को खुद अपनी आवाज बननी होगी। उन्हें अपने भीतर बैठे किसी भी तरह के डर को खत्म कर एक जुटता के साथ अपनी बात खुद कहने की हिम्मत लानी होगी। विभिन्न बाल गतिविधियों के जरिये बच्चों में यह मजबूती लाई जा सकती हैं।
पूरी रिपोर्ट यहाँ पढें -https://docs.google.com/file/d/0B-l2H_yg9SKTaFFjdFNOMnNYNHc/edit

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