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Saturday, May 12, 2012

मां बनने के लिए मुफीद जगह नहीं है अपना मुल्क !


मांओं की सेहत के मामले में भारत का स्थान वि में 76वां भारत में हर 140 महिलाओं में से एक पर बच्चे को जन्म देने के दौरान मरने का जोखिम मदर्स डे पर जारी रिपोर्ट में दी गई जानकारी मदर्स डे पर विशेष

नई दिल्ली (एजेंसियां)। ऐसा लगता है कि मां बनने वाली महिलाओं के लिए भारत अच्छी जगह नहीं है क्योंकि मांओं की सेहत के मामले में भारत को दुनिया के 80 कम विकसित देशों में 76वां स्थान मिला है और वह कई गरीब अफ्रीकी देशों से भी नीचे है। आज ‘मदर्स डे’ के मौके पर जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार से जुड़े गैरसरकारी संगठन ‘ सेव द चिल्ड्रन’ की वि की मांओं की स्थिति पर जारी रिपोर्ट में इस साल भारत को पिछले साल के 75वें स्थान से एक स्थान और नीचे 76वां स्थान दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में मां अथवा महिला की क्या स्थिति है। 

रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 140 महिलाओं में से एक पर बच्चे को जन्म देने के दौरान मरने का जोखिम रहता है। यह आंकड़ा चीन और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में कहीं अधिक है। चीन में हर 1500 महिलाओं में से एक महिला पर प्रसव के दौरान मौत का खतरा होता है। इसी तरह श्रीलंका में यह आंकड़ा 1100 पर एक और म्यांमा में 180 पर एक है। रिपोर्ट के अ न्ा ु स्ाा र भारत में आधे से कुछ कम (49 प्रतिशत) महिलाएं किसी न किसी तरह के आधुनिक गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करती हैं और 53 प्रतिशत प्रसव कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए जाते हैं, जो विकासशील देशों में निम्नतम में पांचवें स्थान पर है। भारत में पांच वर्ष से कम आयु वर्ग के सबसे ज्यादा 43 प्रतिशत बच्चे हैं और सभी विकासशील देशों में बाल कुपोषण की दर भारत में सबसे ज्यादा है। दुनिया में बाल कुपोषण की दर के लिहाज से भारत तिमोर-लेस्ते के बाद दूसरे स्थान पर यमन के साथ है। ‘सेव द चाइल्ड इंडिया’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी थामस चांडी के अनुसार, ‘हालांकि भारत ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर और अन्य उपाय करके मांओं की सेहत सुधारने के लिए प्रयास किए हैं, लेकिन इससे हालात में बहुत ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा।’

उन्होंने कहा, ‘इस रिपोर्ट से पता चलता है कि अब भी भारत में करीब आधे प्रसव कुशल स्वास्थ्य कर्मियों के बिना कराए जाते हैं। यह माओं के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है और चूंकि बच्चे का स्वास्थ्य सीधे-सीधे मां के साथ जुड़ा होता 

है। इसलिए बच्चे की सेहत भी प्रभावित होती है। महिलाओं की शिक्षा की बात करें तो भारत में महिलाओं के लिए औपचारिक स्कूली शिक्षा का औसत सिर्फ दस वर्ष है। यह चीन और श्रीलंका (12 वषर्) से भी कम हैं। चांडी कहते हैं कि लड़कियों को शिक्षित करने के मामले में भारत की खराब स्थिति उसे विकासशील देशों में निचले दस स्थान वाले देशों में रखती है। एशिया में बांग्लादेश और नेपाल को नवजात और शिशु के भोजन से जुड़े मामलों में अच्छा बताया गया है, जबकि अफगानिस्तान और भारत को ठीकठाक और पाकिस्तान एवं वियतनाम को खराब बताया गया है। संगठन के नीति और परामर्श निदेशक शिरीन वकील मिलर ने कहा कि बच्चे को सिर्फ मां का दूध उसके पोषण का सबसे महत्वपूर्ण स्रेत है, लेकिन भारत में सिर्फ 46 प्रतिशत बच्चों को ही शुरू के छह महीने में सिर्फ मां के दूध पर रखा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार मां की सेहत के मामले में सबसे खराब स्थान अब अफगानिस्तान की जगह निगेर बन गया है, जबकि नाव्रे ने मांओं के लिए सबसे अच्छी जगह का स्थान बरकरार रखा है।

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