Monday, November 18, 2013

प्रेस विज्ञप्ति - बाल अधिकार संगठनों द्वारा मध्यप्रदेश में बच्चों की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी


विधानसभा चुनाव में राजनैतिक दल प्रदेश  के बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ अपने चुनावी वादों और कार्यक्रमों में शामिल करें



भोपाल: दिनांक 18 नवंबर 2013. क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू),मध्य प्रदेश  लोक संघर्ष साझा मंच, हिफाजत और सहयोगी संस्था /संगठनों द्वारा मध्य प्रदेश  में बच्चों की स्थिति पर श्वेतपत्र जारी किया गया है। इस श्वेतपत्र को जारी करने का प्रमुख उद्देष्य विभिन्न राजनैतिक दलों को प्रदेश  में बच्चों की स्थिति से अवगत कराना है, साथ ही म.प्र. के इस चुनाव में प्रदेश के बच्चों की स्थिति राजनैतिक, सामाजिक ताकतों, मीडि़या और आम मतदाताओं के बीच बहस का एक मुद्दा बने।

इस श्वेत पत्र में बच्चों से संबंधित ‘‘गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा , मातृत्व एवं बाल स्वास्थ, कुपोषण और बाल सुरक्षा’’ आदि मुद्दों को शामिल किया गया है। एक चेप्टर ‘‘बच्चों के लिए बजट’’ की उपलब्धता एवं उपयोग पर  है साथ ही ‘‘सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य एवं मध्यप्रदेष की स्थिति’’ और ‘‘13वी विधानसभा (मानसून सत्र 2011) के दौरान विधान सभा में बच्चों से संबंधित पूछे गये प्रष्नों’’ का विष्लेषण भी किया गया है। इस श्वेतपत्र में पिछले 5 साल में बच्चों की स्थिति का तुलनात्मक जिलावार स्थिति को टेबल के माध्यम से दर्षाया गया है। श्वेत पत्र के अंत में बच्चों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हमारी मांगे दी गईं हैं।

क्राई की सहायक महा प्रबंधक जया सिंह ने कहा कि ‘‘श्वेतपत्र में इस बात का आंकलन किया गया है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में राजनैतिक दलों ने बच्चों के हित में क्या वायदे किए थे और सरकार बनने के बाद पक्ष और विपक्ष के रूप में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए वे अपने वायदों पर कितना कायम रहे हैं।’’ उन्होनें स्पष्ट किया कि हम सभी संगठन किसी राजनैतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं खड़े हैं, हम केवल बच्चों के अधिकारों के प्रति अपने आपको प्रतिबद्व मानते हैं तथा प्रदेष में बच्चों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कार्यपालिका, विधायिका ,न्यायपालिका और नागरिक समाज के साथ मिल कर जनवकालत और संवाद की प्रक्रिया चला रहे हैं।’’

मंच के संयोजक गोविंद यादव का कहना है कि ‘‘शिक्षा  का अधिकार कानून लागू हुए तीन साल बीत चुके हैं लेकिन प्रदेश  अभी भी बच्चों को षिक्षा का अधिकार देने में काफी पीछे है। म.प्र शिक्षकों की कमी के मामले में देश  में दूसरे स्थान पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश  के बाद भी शालाओं में लड़के और लड़कियों के लिए अलग से शौचालय नहीं हैं। आज भी 19095 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं।  शिक्षा की गुणवत्ता में भी गिरावट आई है बच्चे अपने शिक्षा स्तर के अनुसार लिखना और पढ़ना नहीं जानते हैं।’’

मंच के सचिव जावेद अनीस का कहना है कि ‘‘एस.आर.एस. बुलेटिन सितंबर 2013 के अनुसार प्रदेष में शिशु  मृत्युदर 56 है जोकि देष में सबसे ज्यादा है। प्रदेश  में कुल 80 प्रतिशत शिशु रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन हैदराबाद (एनआईएन) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 51.77 प्रतिशत बच्चे सामान्य से कम वजन के पाए गए हैं। सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य के अनुसार देखें तो हम काफी पीछे हैं वर्ष 2015 तक शिशु मृत्यु दर को 37 लाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक की प्रगति को देखते हुए लगता है कि यह 2015 तक 58.7 तक ही पहुंच पाएगी उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश  में बच्चों की स्थिति बहुत दयनीय है।

हिफाजत की कोर्डिनेटर रेखा श्रीधर का कहना है कि, वर्ष 2010-2011 में कुल 17940 बच्चे गायब हुए थे। इसी तरह प्रदेश  में 7306 नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई हैं इस शर्मनाक घटना में मध्य प्रदेश  देश में पहले स्थान पर है। इसी तरह से बच्चों के साथ हुए अपराध के मामले में प्रदेश, पूरे  देश  में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में एंटी ह्यूमैन ट्रेफिकिंग सेल बनने के बावजूद 17940 बच्चे गायब हुए हैं। दूसरी तरफ लाड़ली लक्ष्मी योजना, बेटी बचाओ अभियान, कन्यादान योजना संचालित कर रही है फिर भी मध्य प्रदेश बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है।

2011 जनगणना के अनुसार म.प्र. में 0 से 6 साल के बच्चों की संख्या 10,548,295 है जो कि प्रदेष की कुल आबादी का 14.5 प्रतिषत है। ऐसे हम यह आशा करते हैं कि प्रदेश  के आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान सभी राजनैतिक पार्टियाँ बच्चों के समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ अपने चुनावी वादों और कार्यक्रमों में शामिल करेगें और चुनाव के बाद बनने वाली सरकार में पक्ष या विपक्ष के रुप में कार्य करते हुए वे अपने वादो और अपने कार्यक्रमों को पूरी दृढ़ता और ईमांदारी के साथ लागू करने का संकल्प प्रस्तुत करेंगीं।

गोविंद यादव
संयोजक
मध्य प्रदेश  लोक संघर्ष साझा मंच

Daband Dunia 19 November 2013






Press Release
Put Children First”- Appeal to political parties to prioritise child rights during upcoming state elections

HT Bhopal 19 November 2013


Bhopal, 18th November, 2013- In the run up to assembly elections in the state of Madhya Pradesh, CRY- Child Rights and You and its state alliances, MPLSSM- Madhya Pradesh Lok Sangharsh Sajha Manch and Hifazat network, have released a white paper on the situation of children in the state.

The objective of this white paper is to highlight the gaps and create awareness among political parties and general public on the issues related to child rights so that these stakeholders give utmost important to children whose voices are rarely heard. CRY believes that elections are a crucial time for taking stock of our collective response to children’s needs and for reaffirming or adjusting course to ensure we’re doing the best we can to fulfill them. 

Through this white paper, CRY and MPLSSM are keen to throw light on challenges faced by millions of children in the state and it includes issues such as Quality Education, Maternal and Child Health, Malnutrition and Child Protection. There’s one chapter on the “Budget for Children”, its implementation and gaps, situation of children in Madhya Pradesh according to Millennium Development Goals and most importantly, analysis of questions raised during 13th assembly (Monsoon session 2011) are highlighted. This white paper also includes status of child rights in different districts of Madhya Pradesh in a tabular format, which gives a clear picture of the critical areas.

We will disseminate this white paper at the district level also, Rewa, Satna, Shahdol, Umaria, Rajgadh, Sagar, Damoh, Mandla, Dindori, Gwalior, Sheopur, Indore, Hoshangabad, Harda, Baitul to name a few.

According to Govind Yadav, Convenor- MPLSSM, “It has been three years since RTE Act was implemented but the status is far from normal. There is a shortage of qualified teachers and other facilities that are a part of RTE Act. Even after the orders from Honourable Supreme Court, there are many schools in the state that do not have separate toilets for girls and boys. An estimate of 19095 schools in the state has only one teacher to take care of all the children, and the quality of education is deteriorating day by day.”


Jaya Singh, Associate General Manager, CRY- Child Rights and You, said, “In this white paper, CRY lays out some of the most significant difficulties children are facing in Madhya Pradesh. We are meeting key political parties in MP with a demand to put the rights of children on top priority during assembly elections. CRY would also like to emphasize that partner’s collectives of Child Rights and You in Madhya Pradesh are in a neutral position and we are not biased towards any political party.”

Javed Anis, Secretary, MPLSSM, highlights the gruesome situation of health facilities available to children, he points out:
·       According to SRS bulletin, September, 2013, infant mortality rate in Madhya Pradesh is 56, which is highest in the country
·       80% Paediatricians posts are lying vacant
·       According to a report from National Institute of Nutrition, Hyderabad, the weight of 51.77 children was far below from normal
·       According to Millennium Development Goals, IMR (Infant Mortality Rate) target should reach 37 in 2015 but current status shows that at this rate, we’ll reach 58.7 till 2015.

Child Protection Mechanism in the state is also not functioning properly, Rekha Sridhar, Coordinator, Hifazat, says, “In the year 2010-11, a total of 17940 kids went missing, 7306 girls below the age of 18 were raped. These figures reveal the status of child protection in MP. There is a clear lack of intent and will when it comes to counter the crimes against children”.
Our demands from various political parties sums the white paper and we hope that children will get the importance in the manifesto & agenda of political parties during the assembly elections in Madhya Pradesh.

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