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Saturday, October 6, 2012

मध्य प्रदेश में बच्चों की स्थिति


रेखा श्रीधर



भारत में करीब 125 करोड लोग रहतें हैं इनमें से एक तिहाई आबादी 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की है। मानव विकास सूचकांक के अनुसार पूरे विश्व में आर्थिक स्थिति के आधार पर भारत 127 वें स्थान पर है। बाल अधिकारों के मामले में भारत विश्व  स्तर पर काफी पीछे हैं। इसी कारण भारत में बाल अधिकारों और बाल सुरक्षा के मामलों में काफी भयावह स्थिति है। हाल ही में केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में भारत की तुलना में सर्वाधिक बच्चें कुपोषित हैं अन्य राज्यों के बच्चों की अपेक्षा यहां के बच्चों का वजन काफी कम है।

मध्य प्रदेश में कुल 60 प्रतिषत बच्चे कुपोषित हैं जब कि झारखंड में 56 प्रतिषत, बिहार में 55.9 प्रतिषत बच्चे कुपोषित हैं। जो कि तीसरे स्थान पर है। सबसे ज्यादा चैकाने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेष बच्चों पर हुए अपराध के मामले में भी प्रथम स्थान पर है। मध्य प्रदेश के लिए यह चेतावनी है कि प्रदेष में बच्चों के साथ हुए अपराध के हर रोज 12 केस दर्ज हो रहे है।  इसका मतलब है कि 330 केस हर माह और 4290 केस हर वर्ष दर्ज हो रहे हैं।

नेशनल क्राइम रिकार्ड व्यूरो के अनुसार मध्य प्रदेश पूरे देश  में बच्चियों के साथ हुए उत्पीड़न के मामलों में प्रथम स्थान पर है। नेशनल क्राइम रिकार्ड व्यूरो के वार्षिक रिपोर्ट 2009-2010 के अनुसार कुल 4646 केस बच्चों के विरूद्व अपराधिक प्रवृत्ति के दर्ज हुए हैं। सर्वाधिक 337 केस इंदौर से 257 केस जबलपुर में और 127 केस भोपाल शहर में दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 1071 नाबालिग बच्चियों के साथ रेप केस दर्ज किए गए है। जो कि पूरे भारत के रेप केस का 20 प्रतिशत है इस प्रकार, बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में भी मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है जहां पर 625 केस दर्ज हुए हैं। और तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र हैं जहां 612 केस दर्ज किए गए हैं। जब शहरों की बात आती है तो दिल्ली प्रथम स्थान पर हैं जहां 258 केस दर्ज हुए हैं। और मुंबई दूसरे स्थान पर है जहां 85 केस दर्ज हुए हैं और भोपाल तीसरे स्थान पर है जहां पर 77 केस दर्ज हुए हैं। यह तो वह तथ्य हैं जो रिपोर्ट के अनुसार हैं इनके अलावा कई केस ऐसे भी हैं जो दर्ज नही हो सके हैं।

इसी तरह आगे देखें तो 115 बच्चे मारे गए हैं मध्य प्रदेष में, 363 उत्तर प्रदेश में, 181 महाराष्ट्र में 126 बिहार में, यहां पर भोपाल छटे स्थान पर है जहां 7 बच्चों की हत्या की गई एवं दिल्ली पहले स्थान पर है जहां 65 बच्चों की हत्या की गई हैं। प्रदेश में 283 मामलें बच्चों के अपहरण के दर्ज किये गये हैं।

प्रदेश में यौन उत्पीड़न की बात करें तो कुल 1403 केस दर्ज किए गए हैं इस आधार पर कहा जा सकता है कि, मध्य प्रदेश में हर रोज 3 बच्चे यौन उत्पीड़न का शिकार  होते हैं।

इन सभी स्थितियों को देखें तो मध्य प्रदेष के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों के संरक्षण की है। जब कि मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा बच्चों के संरक्षण के लिए कई योजनाओं और अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है। पर यह सोचने पर हम मजबूर हो जाते हैं कि इतनी सारी योजनाओं के बावजूद क्या इन परिस्थितियों में कोई बदलाव होगा या ऐसी ही स्थितिया हमें देखने को मिलेंगी। जहां हमें शर्म से कहना होगा कि बच्चों के संरक्षण के मामले में मध्य प्रदेश अव्वल है।      

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